Live

:- पवन कुमार की रिपोर्ट

जहानाबाद। भगवान श्री कृष्ण की लीला अपरंपार है उक्त बातें स्वामी रंग रामानुजाचार्य ने हुलासगंज गोपुरम में आयोजित झूला महोत्सव में बताई ।प्रवचन मे उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का वर्णन करते हुए कहा कि 5 वर्ष की उम्र में भगवान श्री कृष्ण ग्वाल वालों के साथ वन में खाना खा रहे थे। जिसे देख स्वर्ग लोक के देवता आश्चर्यचकित उठे । इसी दौरान उनकी गाय हरी हरी घास के लोभ में बहुत आगे निकल गई ।ग्वाल वालों को जब उस और ध्यान गया तो वे चिंतित हो उठे अपने साथियों की चिंता को देखकर भगवान श्री कृष्ण हाथ में दही भात का कोर लिए हि गाय को ढूंढने निकल गए। इधर काफी खोजबीन किए लेकिन गाय बछड़ा नही मिला। लौटने पर  उनके साथी ग्वाल बाल भी  गायब थे । उनकी गाय एवं  ग्वाल वालों को  ब्रह्मा जी ने  यौगिक क्रिया से गायब  कर दिए थे । गाय बछड़ों एवं ग्वाल बाल के गायब होने पर भगवान श्री कृष्ण को ब्रज वासियों की चिंता सताने लगी ।उन्हें लगा के ग्वाल बाल एवं गाय बछड़ा  शाम को घर नहीं लौटेंगे तो ब्रजवासी उनके वियोग में प्राण त्याग देंगे  फल स्वरुप उन्होंने उतने ही संख्या  एवं अवस्था में ग्वाल बाल ,गाय बछड़ा का रूप धारण कर लिया।तथा सभी के साथ शाम को घर लौट आए। इस प्रकार सभी का सुबह-शाम वन में आने-जाने का सिलसिला बदस्तूर जारी रहा । साल भर में दो-तीन दिन कम था कि ब्रह्मा जी  पुनः स्थिति देखने आ पहुंचे तो देखा कि गाय बछड़ा के साथ ग्वाल बाल सारे  मौजूद हैं एवं कृष्ण जी बांसुरी बजा रहे हैं।  गाय बछड़ा चारा चर रही थी जबकि ग्वाल बाल जंगल में नाच गा रहे थे। ब्रह्मा जी ज्ञान दृष्टि से पूर्व के गाय बछड़े ग्वाल बाल एवं यहां मौजूद गाय बछड़ा एवं ग्वाल वालों के अंतर स्पष्ट करना चाहा तो देखा कि सारे विष्णु स्वरूप में दिख रहे थे। श्याम वणॆ,शंख चक्र कृत कुंडल से विभूषित भगवान विष्णु का स्वरूप को देखकर  आश्चर्यचकित हो गए और भगवान विष्णु के  चरणों में जाकर स्तवन किया । इस प्रकार भगवान श्री कृष्ण गाय बछड़ा, ग्वाल बाल का रूप धर कर काफी दिनों तक लीलाएं की एवं अंत में भगवान विष्णु का असंख्य  रूप धारण कर ब्रह्मा जी को दर्शन दे मोह भंग किया था । उसी विश्व के पालनहार भगवान श्री कृष्ण की सावन मास मे झूला उत्सव में दर्शन का लाभ उठाने के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा है । भगवान श्री कृष्ण की महिमा अपरंपार है ।


Posted by

Raushan Pratyek Media


जरूर पढ़ें

Stay Connected