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:- गोड्डा झारखंड से संजीव कुमार झा की रिपोर्ट                     

गोड्डा : संपूर्ण विश्व में कल ईद-उल-जुहा यानी बकरीद का त्योहार धूमधाम से मनाया जाना है, ईद के ठीक 70 दिन बाद मनाए जाने वाले इस त्योहार को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं, हाट बाजार से खरीददारी हो चुकी हैं और अब बस कल का इंतजार किया जा रहा है। बताते चलें कि बकरीद मुस्लिम समुदाय का प्रमुख त्योहार है, इस दिन साफ-सुथरे कपड़े पहनकर इत्र लगाने की परंपरा है साथ ही खुले मैदान में सामूहिक नमाज अदाकर अल्लाह की इबादत की जाती है। और उसके बाद विभिन्न तरह के पशुओं की कुर्बानी दी जाती है जिसका तीन हिस्सा किया जाता है और उसका दो हिस्सा गरीबों को बांटकर खाया जाता है ताकि समाज में हर तबके के लोगों के घर पर्व का आंनद बना रहे। बताते चलें की इस त्योहार में कुर्बानी का विशेष महत्व है, मान्यताओं के अनुसार एक बार अल्लाह ने हजरत इब्राहिम से उनसे उनकी सबसे अजीज चीज की कुर्बानी मांगी, जिस पर हजरत इब्राहिम पेशोपेश में पड़ गए क्योंकि उनके लिए उनका पुत्र इस्माईल ही सबसे ज्यादा अजीज था, मगर अल्लाह के प्रति समर्पण भाव इतना तेज था की उन्होंने अपने बेटे की कुर्बानी देने का फैसला कर लिया, दूसरे दिन अपने बेटे को लेकर आबादी से काफी दूर निकल गए और कुर्बानी को तैयार हुए, कुर्बानी से ठीक पहले आंख पर पट्टी बांध ली ताकि किसी तरह की भावना उन्हें विचलित न कर सके और अन्त में अल्लाह का नाम लेकर कुर्बानी दी गई मगर कुर्बानी के ठीक बाद जैसे ही उन्होंने अपनी पट्टी खोली तो वे चौंक पड़े, उनके सामने एक भेंड़ की कुर्बानी पड़ चुकी थी और उनका बेटा पास ही सुरक्षित खड़ा था, अल्लाह ने बताया कि असल में वे उनकी परीक्षा ले रहे थे और उनकी परीक्षा में वे सफल साबित हुए।


Posted by

Raushan Pratyek Media


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