• कोविड-19 प्रोटोकॉल के साथ शुरू होगी गतिविधियां

• चलंत चिकित्सा दलों को माइक्रो प्लान बनाने का निर्देश

• राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक ने जारी किया निर्देश

• 50 प्रतिशत की उपस्थिति के साथ जिले में शुरू हुआ पठन-पाठन कार्य

किशोर कुमार की रिपोर्ट

मधुबनी :-कोरोना संक्रमण काल में आंगनबाड़ी केंद्रों एवं सरकारी तथा सरकारी सहायता प्राप्त विद्यालयों को बंद कर दिया गया था| जिसके कारण आंगनबाड़ी केंद्रों एवं विद्यालयों में बच्चों की स्वास्थ्य जांच गतिविधियां बाधित थी | वहीं चलंत चिकित्सा दलों को कोविड-19 संबंधी रोकथाम कार्यों में लगाया गया था। अब सभी सरकारी तथा सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों के 9वीं से 12वीं कक्षाओं में छात्राओं की कुल क्षमता की 50 प्रतिशत उपस्थिति के साथ विद्यालयों को खोल दिया गया है। वर्तमान परिप्रेक्ष्य में जिला शिक्षा पदाधिकारी के साथ विमर्श कर स्कूलों में स्वास्थ्य जांच गतिविधियां प्रारंभ करने का निर्देश दिया गया है। इस संबंध में राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक मनोज कुमार ने पत्र जारी कर दिशा – निर्देश दिया है। जारी पत्र में कहा गया है कि चलंत चिकित्सा दलों को निदेशित किया जाये कि वे संदर्भित कक्षाओं का माइक्रो प्लान तैयार करें। साथ ही जिले में चलंत चिकित्सा दलों को प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।कोविड प्रोटोकॉल का अनुपालन करते हुए बच्चों की स्वास्थ्य जाचं गतिविधियां पुन: प्रारंभ की जाए।

बच्चों का ऐसे होता है इलाज :

आरबीएसके के जिला समन्वयक डॉ. कमलेश कुमार शर्मा ने बताया स्वास्थ्य विभाग द्वारा कार्यक्रम की सफलता के लिए गठित मोबाइल मेडिकल टीम जिले के हर आंगनबाड़ी केंद्र व स्कूलों में पहुंचती है। तब टीम में शामिल आयुष चिकित्सक बच्चों की स्क्रीनिंग करते हैं। ऐसे में जब सर्दी- खांसी व जाड़ा – बुखार जैसी सामान्य बीमारी होगी, तब तुरंत बच्चों को दवा दी दिया जाती ता है, लेकिन बीमारी गंभीर होगी तब उसे आवश्यक जांच एवं समुचित इलाज के लिए निकटतम पीएचसी में भेजा जाता है। टीम में शामिल एएनएम, बच्चों का वजन, उनकी ऊंचाई (हाइट), सिर की परिधि, बांह की मोटाई की नापतौल करेंगी करेगी। फार्मासिस्ट रजिस्टर में स्क्रीनिंग किये गये बच्चों से संबंधित बातों को ऑन द स्पॉट क्रमवार अंकित किया जाता है हे।

बच्चों में 45 प्रकार के डीजीज का टीम करती है चिन्हित:

आरबीएसके के चलन चिकित्सा दलों के द्वारा स्कूलों तथा आंगनवाड़ी सेंटरों में बच्चों में 45 तरह के डिजीज का स्क्रीनिंग किया जाता है साथ ही उन्हें बेहतर चिकित्सा सुविधा के लिए रेफर किया जाता है। आशा कार्यकर्ता के द्वारा एचबीएनसी पर 5  जन्मजात विकृतियों को चिन्हित कर आरबीएसके टीम को सूचित करती है।

क्या है राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम:

राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत 0 से 18 वर्ष तक के सभी बच्चों के चार डी पर फोकस किया जाता है। जिनमें मे डिफेक्ट एट बर्थ, डिफिशिएंसी, डिसीज, डेवलपमेंट डिलेज इन्क्लूडिंग डिसएबिलिटी यानि किसी भी प्रकार का विकार, बीमारी, कमी और विकलांगता है। इसमें 30 बीमारियों को चिह्नित चिन्हित किया गया है।

बच्चों को हेल्थ कार्ड भी दिया जायेगा:

आरबीएसके कार्यक्रम में 0 शून्य से 18 (अठारह) वर्ष तक के सभी बच्चों की बीमारियों का समुचित इलाज किया जाता है। 0 से 6 वर्ष तक के बच्चों की स्क्रीनिंग आंगनबाड़ी केंद्रों में होती है जबकि 6 से 18 साल तक के बच्चों की स्क्रीनिंग उनके स्कूलों में जाकर की जाती।,ताकि चिह्नित बीमारियों के समुचित इलाज में देरी न हो। आंगनबाड़ी केंद्रों पर साल में दो बार यानि प्रति 6 महीने पर जबकि स्कूलों में साल में सिर्फ एक बार बच्चों के इलाज के लिए स्क्रीनिंग की जाती है। स्क्रीनिंग करते वक्त बच्चों को हेल्थ कार्ड भी उपलब्ध कराया जाता है।


 


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Posted by : Raushan Pratyek Media

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