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बेतिया : कालांतर में कुछ ऐसा होगा यह मानव नहीं जनता था , लेकिन जो हुआ वह तो इस ग्रह पर व्याप्त जीवन में ही हुआ । आज जिन ग्रहों पर जीवन नहीं है शायद वहां ऐसी आपदा की कल्पना नहीं की जा सकती । यह कहीं न कहीं प्रकृति के साथ खिलवाड़ का दुष्परिणाम तो नहीं ? प्राकृतिक असंतुलन से व्याप्त प्राकृतिक आक्रोश तो नहीं ? सर्वशक्तिमान प्रकृति ने कभी असंतुलन बर्दाश्त नहीं किया और संतुलन बनाने हेतु प्रकृति प्रदत उपचारों को जब –जब अपनाया तब–तब मानव की तमाम शक्तियों की जड़े हिल गईं । चाहें वह बाढ़ की आपदा हो या भूकंप की , वह प्लेग हो या सुनामी और अब "कोरोंना" । इस भयावह महामारी ने आज विश्व को बहुत बड़ी चुनौती दी है खासकर अत्याधुनिक युग और उच्च स्तरीय विज्ञान को ,

राष्ट्रों की सीमाएं टूट गईं। युद्ध के नगाड़े थम गये, आतंकी बंदूकें खामोश हैं; अमीर-गरीब का भेद मिट गया। आलिंगन, चुम्बन का स्थान; मर्यादित आचरण ने ले लिया। क्लब, स्टेडियम, पब, मॉल, होटल, बाज़ार के ऊपर अस्पताल की महत्ता स्थापित हो गई।  अर्थशास्त्र के ऊपर  चिकित्साशास्त्र स्थापित हो गया। एक सुई, एक थर्मामीटर; गन, मिसाइल टैंक से अधिक महत्वपूर्ण हो गया। मंदिर बंद, चर्च बंद ,दरगाह, मस्जिद बंद! हृदय में विराजमान प्रभु को पूजा जा रहा है। धर्म  पर अध्यात्म स्थापित हो गया। भीड़ में खोया आदमी, परिवार में लौट आया। 

सिर्फ एक वायरस...

हाँ, प्रकृति  ने मनुष्य की प्रवृत्ति पर विजय प्राप्त कर ली है। देखना यह है कि 22 मार्च का दिन जिसे भारत "मानव कर्फ्यू " के रूप में घोषित किया है ऐसे और कितने उपचार करने पड़ते हैं एक कोरोना से लड़ने के लिए । वैसे तमाम सुरक्षात्मक कदम के साथ –साथ लोग इस कर्फ्यू को एक बहुत लाभकारी पहल बता रहे हैं जो देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लिया है। सावधानी और बचाव , उपचार से बेहतर होते हैं इसी बात को ध्यान में रखकर प्रधानमंत्री ने देशवासियों को इस बावत जागरूक किया है। मानवाधिकार निष्पक्ष ब्यूरो के संस्थापक राष्ट्रीय महासचिव मुकुंद मुरारी राम ने भी अपनी संस्था के सभी पदाधिकारियों को इस आपदा में देश के साथ खड़े रहने को कहा है और यथा संभव पीड़ितों की मदद करने को कहा है। मानवाधिकार की इस संस्था के सभी सदस्य और पदाधिकारी देश में अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी निष्ठा और लगन से कर रहे हैं बगैर दिखावा किए। आमजन की जिम्मेवारी है कि पदाधिकारियों और स्वयं सेवी संस्थाओं की बातों पर गंभीरता से विचार करते हुए खुद के जीवन को सुरक्षित करें और एक स्वस्थ और समृद्ध राष्ट्र के लिए एक जिम्मेवार नागरिक बनकर खड़े रहें।।


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