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संजीव झा की रिपोर्ट ।।

 महागामा गोड्डा ।। महागामा के बहुचर्चित व प्रसिद्ध बाजार स्थित दुर्गा मंदिर मैया के बारे में कहा जाता है कि यहां से आज तक कोई खाली हाथ नहीं गया। यही कारण है माता का वैभव दिन दूना रात चौगुना बढ़ता चला जा रहा है। माता के मंदिर का इतिहास लगभग 700 वर्ष पुराना है। राज के वंशज बताते है कि मंदिर का निर्माण राजा मोल ब्रह्म के द्वारा कराया गया था। बर्तमान में राजा के वंशज आठमी पीढ़ी दयाशंकर ब्रह्म, दिलीप ब्रह्म, श्यामलाल ब्रह्म द्वारा आज भी तांत्रिक विधि विधान से पूजा करते चले आ रहे है।

आचार्य अरविंद झा पंडित जयशंकर शुक्ल,शातिष झा, श्यामाकान्त झा,कौशलेश झा, अखलेश मिश्र पवन झा समेत अन्य पंडितो द्वारा तांत्रिक बिधि से पूजा को सम्पन्न कराते आ रहे हैं।

शारदीय नवरात्र में माता शक्ति की आराधना में भक्त लीन हो गए हैं। माता की भक्ति के बीच मंदिर में हो रहा दिव्य मंत्रों के उच्चारण व मंदिर के घंटियों से निकलने वाले स्वर पूरे वातावरण को भक्तिमय कर रहा है।

मंगलवार को माता के भक्तों ने माता के तीसरे स्वरूप माता चन्द्रघंटा की पूजा अर्चना की. माता के मंदिर में सुबह से देर शाम तक भक्तों की भीड़ माता की आराधना में लगे हुए थे।

माता के इस मंदिर में बली देने की प्रथा है जो कलश अस्थापन के बाद एक पूजा से बलि दी जाती है।

वहीं नवरात्र में सप्तमी यानी सात पूजा को मां का चच्छु दान के बाद प्रतिमा को मंदिर में स्थापित की जाती है। इससे पूर्व बेलवरण पुजा होती है। जहाँ हज्जारो भक्तों द्वारा झाड़ू देने के वाद दूध, फूल से रास्ते में बिछाते हुए मां की आगुआनी करते है। तथा रात्रि में मां को छपन्न प्रकार का भोग लगाया जाता है।

आठ पूजा को दिनभर भक्तों द्वारा दलिया चढ़ाते है। संध्या में संध्या पूजा के उपरांत सर्वप्रथम राजा परिवारों द्वारा मां की आराधना करते है उसके बाद आम भक्तों द्वारा फुलाइस रख कर मनोकामना पूर्ण करने की आशीष पाते है।

तांत्रिक बिधि से प्रशिद्ध मां के दरवार में हजारों भक्तों द्वारा तन्त्र मंत्र की सिद्धि प्राप्त करते है।

तथा रात भर जग कर अष्टमी मनाते है।

नो पूजा को भक्तों का पूर्ण हुए मनोकामना के बाद हज्जरों भक्तो द्वारा बकरे की बलि दी जाती है। ततपश्यात मां को विदाई दी जाती है।

वहीं बीजयदशमी के दिन दिनभर भक्तों का तांता लगा रहता है।

अंत में नियमित समय पर मां के प्रतिमा का विषर्जन की जाती है जिसका एक झलक पाने के लिए भक्तों का भीड़ जमा रहती है।

अंत में प्रतिमा विषर्जन के बाद कुमारी कन्याओं को भोजन कर कर पूजा सम्प्पन होता है।।


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Posted by : Pawan Kumar

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