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रंजीत भोजपुरिया  की रिपोर्ट ।।

छपरा : कौन कहता है कि आसमां में सुराख नही हो सकता एक पत्थर तो तबियत से उछाला जाए... यह कहावत सटीक बैठता है सारण जिले मे शुरू हो रही नई पहल पर.

ऐसे तो शुरू से ही सारण की धरती क्रांति की धरती रही है अपनी उपज से हमेशा देश को गौरवान्वित किया है फिर से नई इबादत लिखने की तैयारी हो चुकी है अब दक्षिण भारत में उपजने वाले दुर्लभ किस्म के अनाजों, फल फुल, मसालों व अन्य गुणकारी जड़ी बुटियों का उत्पादन अब उतर भारत के बिहार मे भी होगा. 

यदि सब कुछ ठीक ठाक रहा तो शीघ्र ही सारण जिले में बड़े पैमाने पर काली मिर्च की खेती की जाएगी। वैसे काली मिर्च की खेती बड़े पैमाने पर दक्षिणी भारत के राज्यों में होती है पर सारण जिले में भी काली मिर्च की खेती के लिए प्रयोग शुरू कर दिए गए हैं। प्रयोग के तौर पर इसे रूसी गांव में लगाया गया है। शीघ्र ही इसका विस्तार किया जाएगा। इस संबंध में बिहार किसान संगठन के प्रदेश अध्यक्ष व रूसी गांव के निवासी तारकेश्वर तिवारी ने बताया कि दक्षिण भारत के राज्यों की तरह सारण जिले में भी काली मिर्च की खेती की जा सकती है। प्रयोग के तौर पर इसे कई जगह लगाया गया है। यदि प्रयोग सफल रहा तो इससे किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। काली मिर्च की खेती किसानों के लिए वरदान साबित हो सकती है जिसके माध्यम में अधिक कमाई का रास्ता साफ हो जाएगा।

पेड़ो की छाया तले व गमले में होती है खेती: सब्जियों में मुख्य तौर पर मशाले के रूप में प्रयोग होने वाली काली मिर्च की खेती छायादार पेड़ के तले की जा सकती है। खास बात यह है कि इसे बड़े गमले व प्लास्टिक की बड़ी बाल्टी में भी लगाया जा सकता है। यह लता किस्म की होती है जो पेड़ो के सहारे फैलती है। इसे बार बार लगाने की जरूरत नहीं पड़ती। एक बार लग जाये तो कई वर्षों तक इससे फल निकलता है। इसका फल अंगूर के गुच्छे की तरह होता है जिसमें लालिमा आने के बाद तोड़ कर सुखाया जाता है। 

दस से चालीस डिग्री के अंदर चाहिए तापमान: काली मिर्च की खेती की लिए दस से चालीस डिग्री के अंदर तापमान की जरूरत होती है। इस तापमान के अनुरूप सारण जिले में तापमान आम तौर पर रहता है। इसलिए काली मिर्च की खेती के लिए यहां का तापमान लगभग अनुकूल है। इसकी दो प्रजातियां काली मिर्च तथा सफेद मिर्च होती हैं। दोनों प्रजातियां अच्छी होती हैं पर काली मिर्च को खेती के लिए चयन किया गया है। 

केरल से मंगाए जाएंगे काली मिर्च के पौधे: काली मिर्च की खेती के लिए केरल से पौधे मंगाए जाएंगे। इस संबंध में श्री तिवारी ने बताया कि हालांकि कम मात्रा में मंगाए जाने के कारण एक पौधे की कीमत लगभग दो सौ बीस रुपये आ रही है। यदि ज्यादा मात्रा में पौधे मंगाए गए तो इसकी लागत खर्च में कमी आ सकती है। इससे किसानों को फायदा होगा। उन्होंने कहा कि प्रयोग की सफलता के बाद मेरा प्रयास होगा कि अधिक से अधिक किसान काली मिर्च की खेती से जुड़ें। 

बयान: प्रत्येक न्यूज लाइव के सिटी संवाददाता रंजीत भोजपुरिया के साथ खास बातचीत में उपरोक्त जानकारी देते हुए क्रांतिकारी किसान तारकेश्वर तिवारी ने बताया कि दशहरा से इस पौधे को किसानों के लिए उपलब्ध कराया जायेगा। इसके लिए प्रत्येक पंचायत में एक केंद्र खोला जाएगा ताकि किसानों को आसानी से पौधे उपलब्ध हो सकें। शीघ्र ही दुर्लभ जड़ी बूटियों की खेती की ओर संगठन अग्रसर होगा। अब तक दुर्लभ किस्म के अनाज, जड़ी बूटी, फल फुल व मसाले जिसकी उपज भारत सहित अन्य देशों में होता रहा है अब इनका उत्पादन सारण जिले में भी होगी जिसकी शुरूआत हो चुकी है.

अन्य उत्पादन में दुर्लभ किस्म के मशरूम, मेंथा, काला चावल, काला गेहूं शामिल है जिसका उत्पादन बिहार के कई हिस्सों में किया भी गया है ।।

  


  




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