मोतिहारी:-तेतरिया प्रखंड में भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में हम कम्युनिस्टों की भूमिका अहम रही है। देश स्वतंत्र हो जाए, लोगों को आर्थिक गुलामी ,मानसिक गुलामी से मुक्ति मिले और आर्थिक स्वतंत्रता, मानसिक स्वतंत्रता ,अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, समानता का अधिकार, जीने का अधिकार सहित सभी मौलिक अधिकारों का हक आम जनता को प्राप्त हो इसके लिए हमारे पूर्वजों ने अंग्रेजों से संघर्ष कर जेल के सलाखों ,काला पानी की सजा तक खुशी खुशी भुगत लिया।उक्त बातें भारत की कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी के जिला मंत्री कामरेड सत्येन्द्र कुमार मिश्र ने  भारत की कम्युनिस्ट पार्टी मार्क्सवादी के मेहशी चकिया तेतरिया लोकल कमिटी द्वारा ठिकहिया में आयोजित सेमिनार को संबोधित करते हुए कही। श्री मिश्र ने कहा की प्राप्त दस्तावेजों के मुताबिक 1943 के कम्युनिस्ट पार्टी के प्रथम महाधिवेशन जो मुंबई में आयोजित था उसमें उपस्थित 138 प्रतिनिधियों में से एक सौ प्रतिनिधि 411 वर्ष 18 माह 46 दिन का जेल जीवन रहा। महासचिव कामरेड पीसी जोशी चुने गए ।इतनी जेल जीवन शायद ही किसी की होगी सबसे महत्वपूर्ण साथी कॉमरेड हरकिशन सिंह सुरजीत ,ज्योति बसु , ई एम एस नामुद्रीपाद, ए.के. गोपालन, पी राम मूर्ति, पी सुंदरैया, प्रमोद दासगुप्ता, एम वासुपुनैया ने ही 60 वर्षों तक जेल जीवन व्यतीत किया और स्वतंत्रता आंदोलन में अहम भूमिका में रहे। जो 1964 ईस्वी के कोलकाता में आयोजित 7वें महाधिवेशन में हमारे पोलितब्यूरो सदस्य के रूप में चुने गए थे। सेमिनार को संबोधित करते हुए लोकल कमिटी के मंत्री मुकेश कुमार ने कहा की आज जो देश भक्ति का ढिढोरा पिटते है उनकी अंग्रेजों के साथ मिताई भी अच्छी थी। उसके शरीखे हिंदूवादी नेता श्यामा प्रसाद मुखर्जी , डी वी सावरकर गोलवलकर जैसे सरीखे लोग अंग्रेजों के दमन के आगे शीश नवाते हुए माफीनामा तक दे डाली और सरकारी गवाह बनने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ नहीं बोलने का वचन भी दिए जिसके अनेकों प्रमाण है। जबकि हमारे विचारधारा से लैस शहीदे आजम भगत सिंह ,चंद्रशेखर आजाद, खुदीराम बोस ,राम प्रसाद बिस्मिल, राजगुरु, सुखदेव, उधम सिंह, सहित अनेकों लोग मौत स्वीकार किया किंतु अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ बोलते रहे ।क्रांति करते रहे झुके नहीं ।उन्होंने ने अपने वक्तव्य में कहा की देश आजाद होने में जो क्रांतिकारियो ने भूमिका निभाई थी इसे उस वक्त के साहित्यकारों ने या तो छुपाने का काम किया या इसे इतिहास के पन्नों में डालने में भूल की ।अपने संबोधन में जिला कमिटी सदस्य अजय कुमार ने कहा कि देश की स्थिति  बदतर होते जा रही है और ए जिनकी स्वतंत्रता आंदोलन में कहीं भी क्रांतिकारी भूमिका नहीं थी ।जेल जाने से डरते थे ।वह आज देशभक्त  कह के देश का अपमानीत कर रहा है। उन्होंने कहा यह लोग देश के आंदोलन के अगुवाई करने वालों में से एक मोहनदास करमचंद गांधी जिसको महात्मा गांधी का नाम चंपारण ने नवाजा उनका हत्या करने वाले नाथूराम गोडसे की वर्षी एवं जन्मदिन पर खुशी जाहिर करने फूल माला से स्वागत करने वाले हैं। उन्हों ने कहा की जनता में गुमराह फैलाने के लिए गांधी जीके चश्मा एवं उनके शरीर पर माल्यार्पण करते हैं। जो आजादी की लड़ाई में अपने प्राण तक न्यौछावर कर दिए उनको दरकिनार कर पर्दों के पीछे रख दिया और जो अंग्रेजी हुकूमत के चमचागिरी में माहिर थे उन्हें भारत रत्न जैसे पुरस्कार तक दे डाली ।कामरेड दिनेश प्रसाद ने कहा कि हमारे पूर्वजों जिनकी संख्या सैकड़ों में थी जेल काटे काला पानी की सजा भुगते किंतु स्वतंत्रता सेनानी का पेंशन तक नहीं लिया हमारे बिहार के भी अनेकों सरीखे लोग जैसे सियावर शरण श्रीवास्तव गणेश शंकर विद्यार्थी केदार मनीष शुक्ला आदि ये भी इन सैकड़ों लोगों में शामिल थे जिन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन के क्रम में जेल जीवन व्यतीत किया किंतु पेंशन लेने से इंकार कर देश के प्रति अपने कर्तव्य प्रस्तुत की। उन्होंने कहा कि ज्ञात होना चाहिए कि अंग्रेजों से लड़ाई के क्रम में ही 1920 ईस्वी में कम्युनिस्ट का स्थापना हुआ और इसी बीच 1936 में ही ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन एवं अखिल भारतीय किसान सभा का गठन किया गया।जिससे आंदोलन को गति मिली तथा 1942 के अंग्रेजों भारत छोड़ो जैसे  आंदोलन को मजबूती मिली ।विवश होकर 1947 में अंग्रेजों को भारत छोड़ना पड़ा। आपको यह भी जानकारी होनी चाहिए की  हिंदू महासभा, मुस्लिम लीग जैसे सांप्रदायिक शक्तियां भी इस दौरान हावी रहे और अंग्रेजो के तलवे चाटते रहे तथा स्वतंत्रता आंदोलन को धूमिल करने का अथक प्रयास भी किया ।1915ईस्वी में 60 बार  सवारकर ने माफी मांगी और अपने माफीनामा में लिखा था कि मुझे उन अपराधियों के आंदोलन से कोई मतलब नहीं है मैं तो सिर्फ देखने गया था अगर देखना अपराध है तो मुझे माफ कर दिया जाए। मैं वादा करता हूं की उस किसी भी लड़ाई में शामिल नहीं रहूंगा जोकि अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ हो। सरकार को जहां कहीं भी आवश्यकता सकता होगी मैं साक्षी के रूप में उपलब्ध रहूंगा।अपने अध्यक्षीय भाषण में शैलेंद्र प्रसाद कुशवाहा ने कहा कि  स्वतंत्रता आंदोलन के शुरुआती दौर से लेकर 1947 तक और फिर आगे भी देश हित में जो हम कम्युनिस्टों की भूमिका रही है वह देश भक्ति है। किंतु जो हिंदूवादी संप्रदाय मुस्लिम वादी संप्रदाय एवं अन्य धार्मिक उनमादियों की भूमिका स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर अभी तक देशहित नहीं  देश को बांटने एवं सारी सरकारी संपदा बेचने धार्मिक उन्माद में लोगों को बांट कर कारपोरेट जगत को लाभ दिलाने एवम पुनः अंग्रेजी हुकूमत जैसे लोगों को गुलामी की तरफ धकेलने के प्रयास के विरुद्ध हम कम्युनिस्टों की भूमिका होनी चाहिए कि इनके खिलाफ जन जागरण अभियान चलाकर जनता के बीच इनके कुरीतियों को प्रचारित करें और जन भावनाओं को जगाकर उनके तमाम गलत नीतियों के विरुद्ध गोलबंदी करें और इनके द्वारा झूठे प्रचार को बेनकाब करते हुए दिल्ली के सिंहासन से खदेड़ने का काम करें। यही हमारी असली देशभक्ति होगी, यही हमारा संकल्प होगा और देश रक्षा के लिए हमारी यही कर्तव्य होगा।सेमिनार को मो०जमालुदीन,विक्की कुमार,वीरेंद्र यादव,नंदकिशोर प्रसाद ,दिनेश प्रसाद कुशवाहा,पूर्व जिला पार्षद शंभू दास ने संबोधित किया।मौके पर महेंद्र सहनी,अकिंद्र प्रसाद,धर्मनाथ यादव, मोहमाद हुसैन,उदय कुमार कुशवाहा सहित अन्य लोग उपस्थित थे।


 


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Posted by : Raushan Pratyek Media

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