किशोर कुमार ब्यूरो रिपोर्ट

मधुबनी-देश में महामारी के  नियंत्रण के लिए इंटीग्रेटेड हेल्थ इनफॉरमेशन प्लेटफॉर्म (आईएचआईपी) 1 अप्रैल 2021 को लांच किया गया था जिसके तहत शहर या गांव में फैल रही बीमारियों के बारे में स्वास्थ्य विभाग, प्रदेश सरकार व केंद्रीय स्वास्थ्य विभाग को प्रतिदिन डाटा भेजा जाता है। अब  कोरोना के संभावित तीसरे वेब के संक्रमण प्रसार को नियंत्रित करने के लिए कोरोना के मरीजों का "आईएचआईपी" पोर्टल पर एएनएम द्वारा एंट्री किया जाएगा।ताकि समुदाय में फैलने वाले संक्रमण को समय से पूर्व  पता लगाया जा सकता है तथा नियंत्रित किया जा सकता है। विदित हो कि स्वास्थ्य विभाग ने जिले के किसी भी गांव व शहर में बीमारियों का पता तत्काल लगाने के लिए "इंटीग्रेटेड हेल्थ इंफॉर्मेशन प्लेटफॉर्म पोर्टल" की शुरुआत की है। इस प्लेटफार्म पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की आशा, एएनएम संबंधित इलाके में बढ़ने वाली बीमारियों का आंकड़ा सीधे पोर्टल पर अपलोड करती हैं। इसके जरिए प्रदेश व केंद्रीय स्वास्थ्य विभाग को उसके निवारण के लिए गंभीर कदम उठाने में सहूलियत होगी। इसको लेकर संबंधित कर्मी आशा एवं एएनएम को प्रशिक्षण भी दिया गया है। प्रशिक्षण में एएनएम को इंटीग्रेटेड हेल्थ इंफॉर्मेशन प्लेटफॉर्म पोर्टल पर बीमारियों का रिकॉर्ड अपलोड करने की जानकारी दी गई है। आईडीएसपी एपिडेमियोलॉजिस्ट अनिल चक्रवर्ती ने बताया कि जिले के अलग-अलग इलाकों में बीमारियों के लक्षण की पुष्टि होने पर मैनुअल डाटा स्वास्थ्य विभाग को भेजा जा रहा था। बीमारियों का आंकड़ा जिला, प्रदेश सरकार व केंद्रीय हेल्थ विभाग तक पहुंचने में करीब एक महीने का वक्त लगता था। ऐसे में संबंधित इलाके में बीमारियों के प्रकोप को नियंत्रित करने के लिए स्वास्थ्य विभाग की ओर से गंभीर कदम उठाने में देर हो जाती थी। इसको ध्यान में रखते हुए देश भर में एक अप्रैल से इंटीग्रेटेड हेल्थ इंफॉर्मेशन प्लैटफॉर्म पोर्टल को लांच किया गया। आशा, एएनएम  मरीजों में होने वाली बीमारियों की जानकारी पोर्टल पर अपलोड करती हैं। एएनएम घर-घर जाकर डाटा एकत्रित करती है। व डाटा आईएचआईपी पर अपलोड करती हैं। जिले के सभी सरकारी अस्पताल को इससे जोड़ा गया है। जैसे ही किसी व्यक्ति का कहीं इलाज होगा, उसका पूरा ब्योरा आईएचआईपी पर दिखने लगेगा। 

तुरंत मिलेगी सूचना:

इस एप के जरिए आशा, एएनएम आदि को तुरंत ही मिलने वाले सभी मरीजों का डाटा ऑनलाइन फीड करना होता है। यही नहीं अगर गांव में किसी दूसरी बीमारी के मरीज भी मिलते हैं तो उनकी जानकारी भी इस एप तुरंत अपलोड करनी होती है। जितने लोग पीडि़त होंगे, उनकी संख्या एप पर उसी समय फीड करनी होती है व  रियल टाइम लोकेशन भी फीड करनी होती है। मरीजों की संख्या फीड होते ही पीएचसी प्रभारी, सीएचसी प्रभारी, एसीएमओ  और अन्य अधिकारियों को इसका मैसेज  पहुंच जाता है। सीएचसी प्रभारी को उस पर तत्काल टीम बनाकर कार्रवाई करते हुए रिमार्क डालना होगा। इसकी जानकारी स्वास्थ विभाग के पास पहुंचेगी। इस एप को चलाने के लिए जिला स्तर पर ट्रेनिंग दे दी गई है। 

तीन फॉर्म होंगे फीड:

इस एप में तीन प्रकार के फार्म हैं। एस, पी और एल। फॉर्म एस में बुखार, खांसी आदि बीमारी कब से है। इसके बारे में पूरी जानकारी एएनएम को डालनी होगी। इसके अलावा फॉर्म पी में संभावित मरीजों की जानकारी डालनी होगी। फार्म एल पैथोलॉजी से संबंधित होगा है, जिसमें यदि कोई मरीज अपनी जांच कराने आता है तो इस पर इंटर्नल और एक्सटर्नल जानकारी दी जाएगी। इसके अलावा विभाग की ओर से इस एप के जरिए 33 बीमारियों का रिकार्ड रखा जाएगा। जिसमें कोरोना मरीज से संबंधित डाटा जोड़ा गया है। इस एप के लिए शुरुआती ट्रेनिंग दे दी गई है। ऑनलाइन ही सभी मरीजों का डाटा फीड किया जाएगा। ऐसे में मरीजों के प्रति बरती जाने वाली लापरवाही पर रोक लग सकेगी।

एसीएमओ डॉ. सुनील कुमार ने बताया बुखार, डायरिया या हेपेटाइटिस समेत कई बीमारियों की जानकारी स्वास्थ्य विभाग द्वारा ऑनलाइन डाली जाएगी। साथ में मरीजों का पूरा रिकार्ड भी ऑनलाइन होगा। वहीं स्वास्थ्य विभाग से लेकर सीएचसी तक पर मरीज का पूरा अपडेट रखा जाएगा।


 


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Posted by : Raushan Pratyek Media

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