किशोर कुमार ब्यूरो रिपोर्ट

मधुबनी-सदर अस्पताल के एन एम सभागार में विश्व एड्स दिवस पर कार्यशाला का आयोजन किया गया जिसका शुभारंभ सिविल सर्जन डॉ सुनील कुमार झा ने किया। उन्होंने बताया विश्व एड्स दिवस मनाने का उद्देश्य लोगों को एड्स के प्रति जागरूक करना होता है. इसके तहत लोगों को एड्स के लक्षण, इससे बचाव, उपचार, कारण इत्यादि के बारे में जानकारी गई। उन्होंने बताया इसके जागरूकता के लिए देश में कई सामाजिक संगठनों के द्वारा अभियान चलाया जाता हैं जिससे लाईलाज बीमारी से बचा जा सके और साथ ही एचआईवी एड्स से ग्रसित लोगों की मदद की जा सकें। उन्होंने बताया एड्स एक लाईलाज बीमारी हैं जिसके जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से हर साल विश्व एड्स दिवस 1 दिसंबर को पूरी दुनिया में मनाया जाता है। एड्स दिवस को लेकर प्रति वर्ष अलग-अलग थीम तैयार किया जाता हैं. इस वर्ष का थीम “एंड इनइक्वेलिटी, एंड एड्स” है। जिले में एड्स के 8000 मरीज पंजीकृत हैं जिसमें 4617 मारीज एआरटी की दवा सदर अस्पताल से ले रहे हैं।


जागरूकता ही एड्स से बचाव का है कारगर उपाय : 

सिविल सर्जन ने बताया भारत जैसे घने आबादी वाले देश में एड्स से ग्रसित मरीजों की संख्या का कारण यह होता है कि महिला या पुरुषों के द्वारा लापरवाही युक्त व्यवहार यानी सब कुछ जानते हुए भी या तो अंजान बनते हैं या फिर असुरक्षित यौन संबंधों को बढ़ावा देते हैं जो कि एड्स का एक महत्वपूर्ण कारण होता हैं। जरूरी नहीं कि सिर्फ असुरक्षित यौन संबंध बल्कि किसी भी संक्रमित रोग से ग्रसित होने के कारण भी ऐसा होता है और संक्रमण के कारण भी एड्स होने की संभावना बराबर बना रहता है, हालांकि राष्ट्रीय स्तर पर आंकड़ों के मुताबिक, एड्स के मरीजों की संख्या में काफी कमी आई है। एड्स नियंत्रण समिति पटना के प्रयास से राज्य में एड्स संक्रमण पर काफी हद तक नियंत्रण किया जा चुका है। हालांकि इसके लिए सभी को जागरूकत रहने की जरूरत हैं। एड्स एक लाईलाज बीमारी है क्योंकि इससे संबंधित जानकारी एवं शिक्षा ही इससे बचाव का सबसे ज्यादा कारगर माध्यम है। सभी गर्भवती महिलाओं को नियमित रूप से एड्स की जांच करानी चाहिए। जिसकी सुविधा जिला मुख्यालय स्थित सदर अस्पताल से लेकर प्रखण्ड स्तर तक के स्वास्थ्य केंद्रों में निःशुल्क उपलब्ध है।


असुरक्षित यौन संबंधों की जानकारी रखेगा सुरक्षित:


एसीएमओ डॉ आर.के सिंह ने बताया कि आज कल के लोगों में खासकर युवा वर्गों में एड्स जैसी लाइलाज़ बीमारी फैलने का मुख्य कारण यौन शिक्षा का न होना है। असुरक्षित यौन संबंध, संक्रमित सूई का प्रयोग, संक्रमित रक्त आदि के प्रयोग के कारण होता है। वहीं एचआइवी संक्रमण से ग्रसित गर्भवती महिलाओं के नवजात शिशुओं को भी एचआइवी संक्रमण होता है। क्योंकि जन्मजात शिशुओं के शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को पूरी तरह खत्म कर देता है। जिससे पीड़ित अन्य घातक बीमारियों जैसे टीबी, कैंसर व अन्य संक्रामक बीमारियों से प्रभावित हो जाता है। एड्स पीड़ित महिला या पुरुष  से पहले सरकारी अस्पताल के चिकित्सकों से चिकित्सीय सलाह लेना चाहिए। 


सरकार द्वारा एड्स पीड़ित व्यक्तियों के पोषाहार के लिए दी जाती है सहायता राशि :


आईसी कम डीआईएस सचिन कुमार पासवान ने बताया कि एड्स पीड़ित व्यक्तियों के बेहतर पोषाहार के लिए सरकार द्वारा बिहार शताब्दी योजना चलाई जाती है। इसके तहत संक्रमित व्यक्ति को हर माह 1500 रुपये की सहायता राशि सीधे उसके एकाउंट में दिया जाता है जिससे कि पीड़ित व्यक्ति बेहतर पोषाहार का सेवन करे।



साथी एप व हेल्पलाइन-1097 से ले सकते है जानकारी:

एचआइवी एड्स के मरीजों या अन्य लोगों को जानकारी के लिए राज्य सरकार के द्वारा साथी एप व 1097 हेल्पलाइन नंबर जारी किया गया है क्योंकिं एड्स के संक्रमण के कारणों व बचाव के संबंध में जानकारी लिया जा सकता हैं। इसके साथ ही 'हम साथी' मोबाइल एप डाउनलोड कर एड्स से संबंधित सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।  यह मोबाइल एप एड्स के प्रति जागरूकता लाने और बच्चों में मां के माध्यम से एड्स के संक्रमण को रोकने के लिए विभिन्न जानकारियां मुहैया कराता है।


मौके पर अस्पताल अधीक्षक डॉ डीएस मिश्रा, एन सी डी ओ डॉक्टर एस.पी. सिंह, सीडीओ डॉक्टर जी.एम ठाकुर, आईसी कम डीआईएस सचिन पासवान, आरती काउंसलर संजय कुमार सिंह, रिंकू कुमारी, पूजा कुमारी, सुमन कुमार लाल कर्ण, डाटा मैनेजर अजीत कुमार पाठक, अभिषेक, फार्मासिस्ट संतोष कुमार सुमन, चंद्रप्रभा कुमारी, परामर्शी अंजू कुमारी, संजय कुमार ठाकुर, सरिता कुमारी, भावेश कुमार झा, सीताराम महतो आदि उपस्थित थे।


 


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Posted by : Raushan Pratyek Media

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