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बैजु कुमार की रिपोर्ट

बिहटा :- इन दिनों मछली की बढ़ती खपत को देखते हुए मत्स्य पालक उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए नयी तकनीक को अपना रहें हैं युवा।युवा कम पानी और कम खर्च में अधिक से अधिक मछली उत्पादन करने हेतु बायोफ्लॉक तकनीक अपना रहे है। बायोफ्लॉक तकनीक एक आधुनिक व वैज्ञानिक तरीका है जिसमे मछली पालन के इस तकनीक को अपनाते हुए मत्स्य पालक न सिर्फ नीली क्रांति के अग्रदूत बनेंगे बल्कि बेरोजगारी से भी मुक्ति मिलेगी। तकनीक के माध्यम से किसान बिना तालाब की खुदाई किए एक टैंक में मछली पालन कर सकेंगे।इसी का एक उदाहरण बिहटा प्रखंड के अमहारा निवासी आशु कुमार ने बताया कि बायोफ्लॉक विधि से मछली पालन का काम चालू किया हु।और युवाओं को जागृत भी कर रहे है,साथ ही कहा कि इसमें कम लागत, कम जगह, कम समय तथा कम पानी में भी ज्यादा मछली का उत्पादन किया जा सकता है। इसमें 10 हजार लीटर पानी में तीन-चार महीने में ही 5 से 6 क्विटल मछली का उत्पादन किया जा सकता है।अमहरा ग्राम में पहला बायोफ्लॉक तकनीक द्वारा मछली उत्पादन का कार्य आशु के द्वारा किया गया है जिसे देख कर बहुत लोग इसे अपनाने कि बात कर रहे है।अमहरा के इस युवा के द्वारा  युवाओ का प्रोत्साहित करने वाला कार्य किया गया है।

  


  




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