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प्रदीप पांडेय की रिपोर्ट

गोंडा-बिकास खंड क्षेत्र इटियाथोक अंतर्गत सरकारी रकम से निर्मित करीब एक दर्जन ग्राम पंचायत सचिवालय आज तक उपयोग में नही आये और वह अब जर्जर भी हो गए। जानकारों की माने तो बीते वर्षो में इनको पैक्सफेड जैसी नामी गिरामी कंपनी ने बनवाया था, जो अब पूर्ण रूप से निष्प्रयोज्य और जर्जर हो गए है। ब्लाक क्षेत्र में बने ऐसे लगभग एक दर्जन भवनो के अंदर बाहर झाड़ व गंदगी व्याप्त है। कमरों व बरामदो में हर तरफ छुट्टा पशुओं के मलमूत्र बिखरे पड़े हैं। दरवाजे खिड़कियां और फर्श आदि क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। कुल मिलाकर यहाँ भारी भरकम सरकारी रकम का दुरुपयोग हुवा जिसकी खोजबीन करने वाला शायद कोई नही है।

ब्लाक क्षेत्र अंतर्गत पूरेमहा, सिंघवापुर, दुल्हमपुर, पर्सिया बहोरीपुर, करूवापारा, बेंदुली, गोसेन्द्रपुर आदि कई स्थानों पर यह जर्जर और निष्प्रयोज्य भवन कही भी देखे जा सकते है। ग्राम प्रधानों की माने तो इनका निर्माण मानक के अनुरूप नही हुवा इस वजह इनको सुपुर्दगी में नही लिया गया और अब यह भवन जर्जर हो गए है। वही क्षेत्र के दुल्हमपुर सचिवालय पर स्वयम ग्राम प्रधान का कब्जा है, जो उनके द्वारा निजी उपयोग में लाया जा रहा है। इसी प्रकार ऐसे कुछ अन्य भवन है जिनको ग्रामीण पशु आदि बांधने के काम मे ला रहे है।

गांव के सभी विकास कार्यों का केन्द्र बिंदु पंचायत सचिवालय होते है जो इन दिनों जर्जर स्थित में है। बताया जाता है की कार्यदाई संस्था और ग्राम प्रधानों में तालमेल न होने से यहाँ इन भवनों की स्थिति बद से बदतर हो गई है। जानकार कहते है की गांव के विकास की सभी गतिविधियों पर चर्चा इन भवनों में की जाती है लेकिन यह भवन स्वयं ही पिछले लम्बे समय से जर्जर अवस्था में पड़े हुए है। क्षेत्र के अनेक भवनो में जगह जगह दरारें आ गई है और इनके ऊपर कटीले पेंड उग आए है। ब्लाक क्षेत्र में जगह जगह इन भवनों के क्षतिग्रस्त होने के बाद भी जिले के अधिकारियों द्वारा इस तरफ कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। ग्रामीण कहते है की अब तो कोई इसकी ओर देखने वाला भी नहीं है। इनकी दीवारे, छत, प्लास्टर आदि कई जगह टूट चुकी है। इनके अन्दर की खिड़किया व दरवाजे भी जर्जर अथवा गायब हो चुके है।

इसके चलते यह भवन दिनों दिन अतिजर्जर होकर हादसे की वजह बनते जा रहे है। इस समय ब्लाक क्षेत्र में इन भवनों की दशा बहुत ही खराब हो गई है। अब कई जगह लोग बैठक के लिए ग्राम प्रधान के घर जाते हैं या फिर सरकारी स्कूल की शरण लेते है।

इस बाबत इटियाथोक ब्लाक के सहायक विकास अधिकारी पंचायत के0 के0 तिवारी ने कहा कि निश्चित रूप से क्षेत्र में निर्मित ऐसे पंचायत सचिवालयों की स्थित वर्तमान में काफी खराब है, प्रकरण की जांच पड़ताल चल रही है।

पुराने पंचायत घर हुए जर्जर, कहा हो ग्रामसभा के कार्य

इटियाथोक ब्लॉक क्षेत्र में कई पंचायत भवन जर्जर हालत में निष्प्रयोज्य पड़े है और इनके जगह नए भवन का निर्माण नही हुवा है। ऐसी स्थित में सम्बंधित ग्राम प्रधानो सहित ग्राम सचिओ को भारी असुबिधाओ का सामना करना पड़ रहा है। गाँवों और ग्रामीणों की दशा सुधारने के लिए सरकार हर ग्राम पंचायत में ऐसे भवनों का निर्माण करवाती है, जहां ग्रामीण और ग्राम प्रधान गाँवों की समस्या और विकास के मुद्दों पर सभा का आयोजन करते हैं, बैठक होती है और मामलो के निवारण की रूपरेखा बनवाई जाती है। ब्लाक के कई गाँवों में पंचायत भवन तो बने हैं, लेकिन उनका उपयोग नहीं हो रहा है। इसका कारण है की यह भवन काफी पुराने और जर्जर हो गए हैं। पूर्व के वर्षो में लाखो रुपये से निर्मित यह भवन अब यहाँ निष्प्रयोज्य हो गए है और इनके फर्नीचर सहित खिड़की, दरवाजे व अन्य सामान कहाँ गए यह कोई नही जानता। सम्बंधित ग्रामीण बताते हैं की पूर्व में गाँव मे होने वाली बैठकें इसी भवन में आयोजित की जाती थी, लेकिन रखरखाव के अभाव में यह भवन जर्जर हो गए है। 

जानकार कहते है की भवन के रखरखाव के लिए आने वाला पैसा भी भवन के रखरखाव में नहीं लगाया जाता है, इस वजह इनकी दशा यहाँ अत्यंत खराब हुई है। यह इतने निष्प्रयोज्य हो गए है की अब जानवरों का डेरा यहाँ पर अक्सर लगा रहता है।

ब्लाक क्षेत्र में जगह जगह पंचायत भवन क्षतिग्रस्त होने के बाद भी पंचायत समिति के अधिकारियों द्वारा इस तरफ कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। इसके चलते यह पंचायत भवन दिनों दिन अतिजर्जर होकर हादसे की वजह बनते जा रहे है।

  


  




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