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पूर्णियां से मलय झा की रिपोर्ट 

पूर्णियां : जीवन में पति पत्नी के बीच प्रेम का  अनमोल रिश्ता है। सात फेरों के बंधन के बाद महिलाएं अपने पति और परिवार के लिए अपना सबकुछ समर्पित कर देती है। ज्येष्ठ मास के अमावस्या तिथि को मनाया जानेवाला पर्व वट सावित्री व्रत का विशेष महत्त्व है। पौराणिक मान्यता है कि इस तिथि के दिन महासती सावित्री ने अपने मृत पति सत्यवान के प्राण वापसी को लेकर दृढ़ आस्था के साथ वट सावित्री व्रत करने का संकल्प लिया था। अपने अटूट विश्वास और भक्ति की शक्ति से सावित्री ने यमराज के मौत के मुंह से वापस लाकर अपने पति के उखड़ चुकी सांसों में जान डाल दी और ये साबित कर दिया कि सच्चे मन से किया गया कार्य व्यर्थ नहीं जाता। इसके उपरांत सदियों से लगातार महिलाएं सुहाग की रक्षा के लिए वट सावित्री व्रत करती हैं। धार्मिक मान्यता है कि जो सुहागिन महिलाएं पूरी निष्ठा के साथ यह व्रत करती हैं उनके पति पर भविष्य में आनेवाले सभी संकट दूर हो जाते हैं। पर्व के मद्देनजर सुबह से महिलाओं में खासा उत्साह उमंग और उल्लास देखा गया। शहर के भूतनाथ मंदिर चौक, फोर्ड कंपनी, जनता चौक, डीआईजी चौक सहित विभिन्न जगहों पर भक्ति भाव के साथ पूजा संपन्न हुई। नूतन परिधान तथा पूरे साज श्रृंगार के साथ सुहागिन महिलाएं पति के लंबी उम्र की कामना को लेकर बरगद पेड़ के नजदीक इकट्ठा होकर श्रद्धा भक्ति पूर्वक पूजा अर्चना करती नजर आ रही थी। पेड़ के नीचे प्रसाद के रूप में मौसमी फल आम, अंगूर, लीची, सेब केला सहित फूल अगरबत्ती जलाकर व्रतियों ने श्रद्धा के दीप जलाए। बांस के बने पंखे से पेड़ को हवा करने का रस्म भी अदा किया गया। पूजा के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग का पूरा ख्याल रखा जा रहा था। अन्य साल की भांति बरगद पेड़ के नजदीक ज्यादा भीड़ नहीं थी। 

  • नाक पर सुहाग का प्रतीक सिंदूर और मन में अपने पति के दीर्घायु जीवन की कामना लेकर पेड़ में लाल कच्चा रक्षासूत्र बांधकर सुहागिनों ने वटवृक्ष की चारों ओर परिक्रमा किया। पंडितों की मानें तो पाप से मोक्ष के लिए परिक्रमा किया जाता है। पूजनोपरांत सभी महिलाएं अखंड सौभाग्य को लेकर एक दूसरे के नाक पर सिंदूर लगाती दिखी। व्रतियों ने कहा कि अपने पति की लंबी उम्र की कामना को लेकर सुहागिन महिलाएं पूजा करती हैं ताकि अखंड सुहाग कायम रहे।।
  


  




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