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•संक्रमण की रोकथाम के लिए नोडल पदाधिकारी किये गए नामित

•सरकारी एवं निजी अस्पतालों के फ्लू कार्नर में सदिग्ध मरीजों की जाँच होगी अनिवार्य

•14 दिनों की केस हिस्ट्री होने पर मरीज को आईसोलेशन वार्ड में किया जाएगा शिफ्ट

•आपातकाल परिस्थति में जिलाधिकारी को जरुरी कदम उठाने का होगा अधिकार 

छपरा : कोरोना वायरस के विश्व एवं देश में बढ़ते संक्रमण को देखते हुए राज्य सरकार हाई अलर्ट पर है. इसको लेकर मंगलवार को बिहार सरकार ने स्पेशल गजट के माध्यम से ‘‘महामारी अधिनियम, 1897’’ के तहत कोरोना वायरस को शामिल किया है. अब यह अधिनियम ‘‘ बिहार महामारी, सीओवीडी-19 अधिनियम 2020’’ के नाम से जाना जाएगा. इस अधिनियम के तहत राज्य में कोरोना वायरस की रोकथाम में आसानी होगी. 

संक्रमण की रोकथाम के लिए नोडल पदाधिकारी किये गए नामित: 

कोरोना वायरस संक्रमण की रोकथाम के मद्देनजर नए अधिनियम के तहत राज्य से लेकर प्रखंड स्तर पर नोडल पदाधिकारी नामित किये गए हैं. जिसमें राज्य स्तर पर निदेशक प्रमुख( संक्रामक रोग), जिला स्तर पर जिलाधिकारी, सिविल सर्जन, अपर मुख्य चिकित्साधिकारी, अनुमंडल एवं प्रखंड स्तर पर संबंधित अनुमंडल अधिकारी एवं प्रभारी चिकित्साधिकारी को नोडल अधिकारी के रूप में नामित किया गया है. 

 सरकारी अस्पतालों के साथ निजी अस्पतालों को भी देना होगा योगदान: 

कोरोना वायरस के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए सरकारी अस्पतालों के साथ अब निजी अस्पतालों को भी कुछ अनिवार्य सहयोग प्रदान करने होंगे. जिसमें सभी अस्पतालों( सरकारी एवं निजी) में फ्लू कार्नर स्थापित करने अनिवार्य होंगे, जिसमें कोरोना वायरस के संदिग्ध मरीजों की जाँच करना भी अनिवार्य होगा. साथ ही अब सभी अस्पतालों ( सरकारी एवं निजी) को कोरना वायरस के सदिग्ध एवं संक्रमित मरीजों की पूरी रिकॉर्ड भी रखनी होगी. यदि मरीज विदेश या ऐसे क्षेत्र से आए हों जहाँ कोरोना वायरस केस की अधिकारिक पुष्टि हुयी हो, तब ऐसे मरीजों का सम्पूर्ण विवरण अस्पतालों को रखना होगा. साथ ही मरीज के द्वारा किसी संदिग्ध मरीज के संपर्क में आने की स्थिति में भी उसकी पूरी जानकारी सभी अस्पतालों को रखनी होगी.

 संक्रमण को लेकर अफवाह फ़ैलाने वालों के खिलाफ़ क़ानूनी कार्रवाई: 

अधिनियम के तहत किसी भी व्यक्ति/ संस्था/ संगठन को अख़बारों, टेलीविजन या सोशल मीडिया के जरिए कोरोना वायरस को लेकर किसी भी तरह के अफवाह फ़ैलाने की छूट नहीं होगी. यदि किसी व्यक्ति/ संस्था/ संगठन को अफवाह फ़ैलाने में दोषी पाया जाता है, तब उनके ख़िलाफ़ क़ानूनी कार्रवाई की जाएगी. 

14 दिनों की केस हिस्ट्री होने पर मरीज को आईसोलेशन वार्ड में किया जाएगा शिफ्ट:

सिविल सर्जन डॉ. माधवेश्वर झा ने बताया कि किसी व्यक्ति में कोरोना वायरस के लक्षण पिछले 14 दिनों से होने पर उन्हें जिला एवं मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में बने आईसोलेशन वार्ड में शिफ्ट किया जाएगा. साथ ही स्टैण्डर्ड प्रोसीजर के मुताबिक उनकी सीओवीडी-19 की जाँच भी जायेगी. यदि कोई व्यक्ति विदेश या सीवीओडी-19 प्रभावित क्षेत्र से 29 फ़रवरी के बाद राज्य में आता है, लेकिन उनमें कोरोना वायरस संक्रमण का कोई लक्षण ( बुखार, सर्दी एवं साँस लेने में तकलीफ़) नहीं मिलता है. तब ऐसी स्थिति में उन्हें अपने घर पर ही रहने की सलाह दी गयी है. साथ ही उन्हें एहतियात बरतते हुए अगले 14 दिनों तक किसी भी व्यक्ति के संपर्क में नहीं आने की हिदायत भी दी गयी है. 

जिलाधिकारी आपातकाल स्थिति में करेंगे जरुरी कार्रवाई:  

अधिनियम के तहत यदि सीओवीडी-19 मामले की रिपोर्टिंग किसी गाँव, शहर, वार्ड या कॉलोनी से होती है, तब जिलाधिकारी को जरुरी कदम उठाने का अधिकार होगा. जिसमें....

प्रभावित क्षेत्र को सील करना 

संक्रमित क्षेत्र से किसी व्यक्ति का बाहर जाना या बाहर से उस क्षेत्र में आने को रोकना 

स्कूल, ऑफिस एवं पब्लिक गैदरिंग को बंद करना 

सीओवीडी-19 मामलों की एक्टिव एवं पैसिव सर्विलांस करना 

अस्पताल से सभी सदिग्ध मामलों का अलगाव करना 

किसी भी सरकारी एवं निजी भवन को मामलों के अलगाव के लिए आकस्मिक इकाई के रूप में नामित करना 

अधिनियम का अनुपालन नहीं करने पर पेनाल्टी: 

यदि किसी व्यक्ति/ संस्था/ संगठन को अधिनियम में उल्लेखित किसी भी नियम को नहीं मानने का दोषी पाया जाता है, तब भारतीय पैनल कोड( 1680 का 45) के तहत क़ानूनी कार्रवाई की जाएगी. जिसमें प्रधान सचिव स्वास्थ्य या संबंधित जिले के जिलाधिकारी दोषी व्यक्ति/ संस्था/ संगठन के ख़िलाफ़ क़ानूनी कार्रवाई कर सकते हैं ।।


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