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राजू सिंह कि रिपोर्ट ।

शास्त्रार्थ से शास्त्र में बढ़ती है रुचि  वीसी

मिथिला लोक मंथन केंद्र में भी होगा शास्त्रार्थ ।।

समापन समारोह में जुटे कई विद्वान ।।

दरभंगा : संस्कृत विश्वविद्यालय के स्थापना दिवस समापन समारोह की अध्यक्षता करते हुए मंगलवार को कुलपति प्रो0 सर्वनारायण झा ने कहा कि शास्त्रार्थ करने से शास्त्र के प्रति रुचि बढ़ती है और उसकी प्रासंगिकता भी बनी रहती है। शिक्षकों को चाहिये कि वे छात्रों तक प्रतिदिन अपनी पहुंच बनाये और शास्त्रों के बारे में ही उससे बात करे। तभी उन्हें सम्मान मिलेगा और शास्त्र भी जीवित रहेगा। सीनेट हाल में आयोजित समारोह में वीसी ने कहा कि कॉलेज स्तर पर भी शास्त्रार्थ करने की तैयारी चल रही है।इससे छात्र शास्त्र के प्रति उन्मुख रहेंगे। उन्होंने जानकारी दी कि संस्कृत विश्वविद्यालय परिसर स्थित मिथिला लोक मंथन केंद्र चेतना में भी बहुत जल्द तीनों परम्पराओं में शास्त्रार्थ होगा जिसमे कई विश्वविद्यालयों के नामचीन विद्वान शिरकत करेंगे।

वहीं कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सिंडिकेट सदस्य डॉ विनय कुमार चौधरी ने कहा कि वीसी प्रो0 झा विलक्षण प्रतिभा के धनी हैं। जिनके कार्यकाल में प्राच्य विद्या में काफी वृद्धि हुई है। उन्होंने वीसी द्वारा किये गए कार्यों की प्रशंसा की। वहीं विशिष्ट अतिथि सिंडिकेट सदस्य डॉ कन्हैया चौधरी ने कहा कि शास्त्रार्थ होने की चर्चा हम सभी किताबों में ही पढ़ा करते थे लेकिन वर्तमान वीसी प्रो0 झा के कारण आज उसे साक्षात दुनिया देख रही है। वीसी के कार्यों की इन्होंने भी प्रशंसा की।

उक्त जानकारी देते हुए पीआरओ निशिकांत ने बताया कि इस मौके पर डा उपेंद्र झा के पर्यवेक्षण में वेद विषय पर डॉ चंद्रेश उपाध्याय एवम डॉ ध्रुव झा के बीच जमकर शास्त्रार्थ हुआ। इसके बाद वीसी ने सभी शास्त्रार्थीयों को प्रमाण पत्र एवम सम्मानीकी भी भेंट की। धन्यवाद ज्ञापन करते हुए प्रो0 सुरेश्वर झा ने शास्त्रार्थ की महत्ता पर भी विस्तार से प्रकाश डाला।मंच संचालन डॉ दयानाथ झा ने किया।।


Posted by

Pawan Kumar


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