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अरवल कुर्था से संजय सोनार की रिपोर्ट ।।

कुर्था अरवल : महान स्वतंत्रता सेनानी सह राष्ट्रीय किसान नेता प० यदुनंदन शर्मा के जन्मस्थली मंझियांवा गांव में उनके कर्मस्थली गया जिला के बेलागंज प्रखंड के ऐतिहासिक नेयामतपुर आश्रम समिति का सात सदस्यीय टीम भ्रमण पर पहुंची। जहां युवा नेता रौशन शर्मा ने ग्रामीणों के साथ स्वागत किया। बेलागंज के नेयामतपुर आश्रम से आये टीम ने प० यदुनंदन शर्मा उच्च विद्यालय के परिसर में स्थापित शर्मा जी के आदमकद प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया। उसके बाद सदस्यों को शर्मा जी के साथ काम करने वाले फकीरचन्द शर्मा व पूर्व शिक्षक रामगोविंद शर्मा ने उनके ग्रामीण जीवनी के बारे में विस्तार से बताया। लोगो ने बताया कि उस समय देश मे किसानों के प्रणेता स्वामी सहजानन्द सरस्वती के बाद सबसे बड़े नेता प० शर्मा थे । लेकिन सिवाय देश, समाज और किसानों के सेवा के अलावा कुछ पसंद नहीं था। अपने हाथों से निर्मित खटांगी उच्च विद्यालय का नाम भी अपने नाम पर रखने के बजाय सरस्वती मंदिर रखा। जो उनके गुरु स्वामी सहजानन्द सरस्वती को समर्पित था।  खुद से निर्मित उस विद्यालय में न तो खुद नही किसी परिवार सदस्यों को कोई लाभ का पद दिलवाया। वे इतने प्रभावशाली थे कि प्रथम राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद, प्रधानमंत्री रहे प० नेहरू, सहजानन्द सरस्वती यहां आया करते थे। एक बार की बात है कि देश आजाद के बहुत भयंकर अकाल पड़ा था। किसानों समक्ष भुखमरी आ पड़ी थी तो लोगों ने प० जी से कहा कुछ कीजिए। इन्होंने तत्कालीन राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद को समस्या को दर्शाते हुए चिट्ठी लिखी। पत्र मिलने के बाद राजेंद्र बाबू मंझियांवा आए तो किसानों के घरों में अनाज रखने वाले मिट्टी के कोठी में हाथ डाला तो सभी जगह खाली मिला इसी उनके हाथों में गेहूं की खूंटी गड़ गई। उन्होंने किसानों हालत चिंता जताते हुए आदेश जारी किए की पूरे बिहार में खेती पर लगने वाले लगान का केवल शेष ही इस गांव के किसानों से लिया जाए जो आजतक लागू है। स्वतंत्रता सेनानी का पेंशन कौन कहे श्रीमती इंदिरा गांधी के द्वारा इन्हें राज्यपाल नियुक्त करने का नोटिफिकेशन जारी कर दिया था उसे लौटा दिया था। ऐसे महान विभूति को देश मे सम्मान मिलना चाहिए था वह आज तक नहीं मिला। इतिहास में इन्हें लोप कर दिया गया है। इनका परिवार(पत्नी, बेटा बेटी) सभी दर दर की ठोकरें खाते रहे। गांव से अस्तित्व मिट गया है। इस दौरान नेयामतपुर आश्रम के संयोजक रविशंकर कुमार ने उनके कर्मस्थली के गौरवशाली इतिहास को लौटाने के लिए किए जा रहे कार्य योजनाओं को विस्तार से बताया। साथ उनके (शर्मा जी) घर और जमीन की स्थिति पर दुख व्यक्त किया। इस मौके पर भ्रमण में टीम के नेतृत्व कर्ता  राजेंद्र राम, प्रभात कुमार मिश्रा, उत्तम शर्मा, राहुल कुमार, मोहित त्रिपाठी, कुणाल शर्मा के अलावे गांव के राम स्वारथ शर्मा, रामानंद शर्मा, परमानंद शर्मा, माधव शर्मा, शेखर शर्मा सहित कई लोग उपस्थित थे।।


Posted by

Pawan Kumar


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