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हरि किशोर सिंह पत्रकार की रिपोर्ट सारण से

मशरक सारण।अगहन बरसे हून पूस बरसे दून, माघ बरसे सवाई फागुन बरसे मूर गवाई" महाकवि घाघ द्वारा रचित दोहा मौसम के बदले मिजाज को देख बिल्कुल फिट बैठ रहा है। दोहे का सीधा अर्थ है कि अगहन में बारिश होने से फसल अच्छी होती है और पूस में वर्षा हो तो दूनी फसल होगी, वहीं माघ में वर्षा होने पर सवाई पैदावार होती है।परन्तु वर्षा अगर फागुन महीने में होती है तो बीज मिलना भी मुश्किल हो जाता है।अब चुकी अगहन,पूस और माह के बजाय बारिस फाल्गुन महीने में हुई तो किसानों का चिंतित होने लाजमी है।मंगलवार को सुबह से ही मैसम के बदले मिजाज के बाद तेज हवा के साथ हुई झमाझम बारिस ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है।इस बीच मौसम विभाग द्वारा 25-26 फरवरी को वर्षापात और ओलबृष्टि की संभावना जताई गई है।ऐसे में किसानों को इस बात का डर सताने लगा है कि कहीं गत वर्ष की भांति इस वर्ष भी रवि फसलो का नुकसान न हो जाए।अनुभवी किसानों का कहना है कि बीन मौसम हुए बरसात से आलू,सरसो और अरहर की फसल बुरी तरह से प्रभावित हुई है।महाशिवरात्रि के बाद से लगातार मौसम के उतार-चढ़ाव को लेकर किसान अभी आलू के फसल की कोड़नी का इंतजार ही कर रहे थे।तबतक बारिस ने उनके उम्मीदों पर पानी फेर दिया।किसानों में इस बात का डर सता रहा है कि कही और ज्यादा बारिस हुई तो आलू के तैयार फसल मिट्टी के अंदर ही सड़ने लगेंगे।जिससे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ेगा।वही बारिस के साथ तेज हवा चलने से अगात सरसों और अरहर के फसल में लगे फूल झड़ने लगे है और पौधे लोट गये है। जिससे व्यापक स्तर पर नुकसान होने की संभावना जताई जा रही है।हालांकि इस वर्ष खेतो पर्याप्त नमी होने की वजह से गेहूँ की बुआई निर्धारित समय से थोड़ा विलम्ब से हुई।ऐसे में देर से बुआई की गई गेहूँ के पौधों में अबतक आशा के अनुरूप बृद्धि नही हो पाई है।जिससे वारिस होना गेहूँ के लिये फायदेमंद बताया जा रहा है।कई अनुभवी किसानों ने अपने अनुभवों को साझा करते हुए बताया कि अक्सर इस मौसम में ओला पड़ने की संभावना बनी रहती है।अगर ऐसा हुआ तो किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।वही दो दिनों से धूप नही निकलने और आसमान में बादल छाये रहने से कृषि कार्यो पर विराम लग गया है।कई किसान दवा की खरीददारी करने के बाद भी रवि फसलो में खरपतवारनाशी दवाओं का छिड़काव नही कर पा रहे है।

हरी सब्जियों के लिये फायदेमंद है,बारिस।

सब्जी की खेती करने वाले किसानों ने बताया बीन मौसम हुई बरसात से हरी सब्जियों को काफी फायदा हुआ है।फिलवक्त खेतो में भिंडी,नेनुआ,लौकी,करेला आदि सब्जियों की खेती की गई है।जिसमे अधिक पानी की आवश्यकता होती है।ऐसे में आसमानी पानी होना पौधों के लिये काफी लाभदायक है।वही किसानों ने बताया कि अब कुछ दिनों तक पौधों की सिंचाई नही करनी पड़ेगी।

बारिस ने बढ़ाई ठंठ।

बिगत एक पखवाड़े से तेज धूप के साथ-साथ तापमान में बढ़ोतरी की वजह से ठंड का प्रभाव काफी कम हो गया था।मगर एका-एक मौसम के करवट लेने और बारिस हवा के चलते तापमान में कुछ हद तक गिरावट दर्ज की गई है।जिससे कुछ हद तक ठंठ का भी असर बढ़ गया।बारिस के बाद पुनः एक बार लोगो को दिन में ही स्वेटर पहनने को मजबूर होना पड़ रहा है।।


Posted by

Pawan Kumar


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