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राजू सिंह कि रिपोर्ट

दरभंगा : आज दिनांक 24 फरवरी 2020 को विश्वविद्यालय समाजशास्त्र विभाग में भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली द्वारा संपोषित सामाजिक विज्ञान में शोध पद्धति कार्यशाला के छठे दिन काशी हिंदू विश्वविद्यालय वाराणसी के सांख्यिकी विभाग के प्रोफेसर ज्ञान प्रकाश सिंह ने शोध में सांख्यिकी पर अपना व्याख्यान देते हुए ने कहा कि सांख्यिकी एक ऐसा  विज्ञान है जिसमें आंकड़ों का संग्रह विश्लेषण व्याख्या, स्पष्टीकरण और प्रस्तुति की जाती है। शोध में सांख्यकी दर्शाते हुए कहा कि सामाजिक विज्ञान में गुणात्मक तथ्यों को गणणात्मक तथ्य  में बदलने में इसका महत्व है। प्रो. सिंह ने सांख्यिकी के उद्देश्यों पर चर्चा करते हुए कहा कि सांख्यिकी घटनाओं एवं आंकड़ों का संकलन करता है ,आंकड़ों का व्यवस्थापन करता है, उपकरणों की जांच व परीक्षण आदि  है । जबकि सारणीयन में वर्गीकृत तथ्यों को एक तालिका के अंतर्गत कुछ इस प्रकार से व्यवस्थित किया जाता है कि  तथ्यों की विशेषताएं एवं उसका तुलनात्मक महत्व और भी अधिक हो जाता है ।

अपने व्याख्यान को आगे बढ़ाते हुए कहा कि सारणीयन के प्रकार और उसका निर्माण का भी ध्यान रखना होगा । उन्होंने सारणीयन को उद्देश्य आकार आवृत्ति के आधार पर बांटा है।

प्रोफेसर ज्ञान प्रकाश सिंह ने एस पी एस एस के बारे में बताते हुए कहा कि यह एक ऐसा सॉफ्टवेयर है जो विश्लेषणात्मक बैच और गैर बैच सांख्यिकी विश्लेषण का काम करता है । इसके वर्तमान संस्करण को आधिकारिक रूप से आईबीएम एसपीएसएस स्टैटिसटिक्स  कहा जाता है ।उन्होंने कहा कि यह सन 1968 में  नोमैन और सी हलाय ने विकसित किया था। उन्होंने कहा की वर्तमान शोध में एसपीएसएस के प्रयोग से शोध का विश्लेषण और निष्कर्ष काफी सटीक होता है ।एसपीएसएस के बिना शोध का निष्कर्ष   वैज्ञानिकता में कमी माना जाता है।

 द्वितीय अतिथि विद्वान के रूप में तीसरे सत्र में इलाहाबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय के भूगोल के सहायक प्राध्यापक डॉ दर्शन कुमार झा ने मात्रात्मक शोध पर अपना व्याख्यान दिया । जिसके अंतर्गत उन्होंने आगमनात्मक और निगमनात्मक पद्धति के ऊपर चर्चा की। उन्होंने कहा कि यह सुनियोजित पारंपरिक रूप से सामाजिक विज्ञान के  साथ ही बाजार अनुसंधान और अन्य संदर्भ में जांच की एक विधि है ।इसमें शोधकर्ताओं का उद्देश्य मानवीय व्यवहार और ऐसे व्यवहार को शासित करने वाले कारणों को गहराई से समझना है। डॉक्टर झा ने कहा कि गुणात्मक विधियां केवल विशिष्ट अध्ययन किए गए मामलों पर जानकारी उत्पन्न करते हैं। इसके अतिरिक्त कोई भी सामान्य निष्कर्ष केवल परीकल्पनाएं हैं । तीनों सत्रों का रिपोर्टिंग सीएम कॉलेज के अर्थशास्त्र विभाग के डॉ रीना तिवारी ने की । अतिथियों के बारे में परिचयात्मक व्याख्यान देते हुए कार्यशाला निदेशक सह विभागाध्यक्ष प्रोफेसर विनोद कुमार चौधरी ने कहा कि कार्यशाला में विभिन्न अतिथि विद्वान के द्वारा अलग-अलग विषय पर अपना व्याख्यान और प्रशिक्षण देने से कार्यशाला अपने उच्च मुकान की ओर अग्रसर है। कार्यशाला में शोध छात्र प्रशिक्षण पाकर उच्च शोध स्तर  की ओर अग्रसर हो रहे हैं । भारतीय सामाजिक अनुसंधान परिषद के द्वारा इस कार्यशाला का इस विश्वविद्यालय में आयोजन होने से  एक उपलब्धि  हासिल हो रही है। अतिथि विद्वान प्रकाश सिंह और दर्शन कुमार झा को मिथला की परंपरानुसार चादर,पाग  और सिक्की  कला से  सम्मानित किया गया । इस अवसर पर विभाग के वरिष्ठ अध्यापक प्रो गोपी रमण प्रसाद सिंह ,डॉ मंजू झा,  प्रो ध्रुव कुमार, प्राण तारती भंजन, डॉ शंकर कुमार लाल , सुश्री लक्ष्मी कुमारी, डॉ सारिका पांडेय आदि उपस्थित थे।।


Posted by

Pawan Kumar


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