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राजू सिंह कि रिपोर्ट

दरभंगा  : आज दिनांक 21 फरवरी 2020 को इग्नू क्षेत्रीय केन्द्र , दरभंगा पर अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस मनाया गया । कार्यक्रम का प्रारंभ क्षेत्रीय निदेशक , सहायक क्षेत्रीय निदेशक एवं मुख्य अतिथि द्वारा दीप प्रज्वलन से हुआ । । कार्यक्रम का प्रारंभ सहायक क्षेत्रीय निदेशक डॉ . राजीव कुमार के द्वारा उपस्थित सदस्यों के स्वागत एवं विषय प्रवेश से हुआ । उन्होंने बताया कि मातृभाषा का महत्व मानव के व्यक्तिगत एवं सामूहिक जीवन में बहुत अधिक है । एक ओर व्यक्ति के व्यक्तित्व विकास में इसकी अहम भूमिका होती है तो दूसरी ओर बहुभाषा - भाषी समाज में सामंजस्य स्थापित करने में इसकी भूमिका उल्लेखनीय होती है । इस अवसर पर मुख्य अतिथि डॉ . डी . एन . सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि बच्चों के व्यक्तित्व का निखार उसकी मातृभाषा के माध्यम से ही संभव हो पाता है । अपनी मातृभाषा को जाने या समझे बिना हमारी पहचान नगण्य रह जाएगी । अपना विकास या अपने समाज का विकास करने हेतु हमें मातृभाषा का अनुसरण करना होगा । अंत में उन्होंने कहा कि मातृभाषा के माध्यम से ही हमारा कल्याण संभव है । तत्पश्चात् श्री मोंमित लाल ने हिन्दी में कविता सुनाई । श्री राजीव रंजन ने मगही भाषा में कविता सुनाई । श्री अशोक कुमार यादव ने इस अवसर पर मैथिली भाषा में अपने विचार रखे । श्री शैलेन्द्र नाथ तिवारी ने मातृभाषा हिन्दी पर आधारित एक कविता का पाठ प्रस्तुत किया । तत्पश्चात् क्षेत्रीय निदेशक डॉ . शम्भु शरण सिंह ने मातृभाषा दिवस मनाने के उद्देश्य पर विस्तार से चर्चा की । 21 फरवरी को मातृभाषा दिवस मनाने संबंधी इतिहास का उल्लेख करते हुए उन्होंने बतलाया कि 17 नवंबर 1999 को यूनेस्को ने मातृभाषा दिवस 21 फरवरी को मनाने की घोषणा की । 21 फरवरी 1951 को बंगला भाषा को सम्मान दिलाने के लिए बांग्लादेश के लोगों ने जो शहादत दी थी उसे बांग्लादेश में बंगला भाषा के लिए बलिदान की स्मृतिस्वरूप 1952 से ही मनाते आ रहे हैं । यूनेस्को की स्वीकृति के बाद 21 फरवरी को अंतर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस के रूप में मनाया जाने लगा । इसका उद्देश्य है विश्व में भाषाई एवं सांस्कृतिक विविधता और बहभाषिता को बढ़ावा देना । उन्होंने सभी सदस्यों से यह भी आग्रह किया कि अपनी मातृभाषा का संरक्षण एवं विकास तो करे ही , साथ ही साथ अन्य भाषाओं के प्रति सम्मान रखते हुए अधिक से अधिक भाषा सीखने का प्रयास करें । मातृभाषा का महत्व शिशु के जीवन में वैसा ही है जैसे माँ के दूध का । माँ के दूध का स्थान गाय का दूध नहीं ले सकता , ठीक वैसे ही मातृभाषा का काम दूसरी कोई भाषा नहीं कर सकती । उन्होंने भाषा के सामंजस्य पर अधिक जोर देते हुए कहा कि मातृभाषा का प्रयोग अपने घर एवं पड़ोस में मातृभाषा जानने वाले लोगों के साथ अपनी मातृभाषा का ही प्रयोग करें जिससे भावी पीढ़ी को विरासत के रूप में मातृभाषा उपलब्ध हो पाए । कार्यक्रम का सफल संचालन सहायक क्षेत्रीय निदेशक डॉ . राजीव कुमार ने किया एवं श्री संजीव कुमार ने धन्यवाद ज्ञापन किया ।इस अवसर क्षेत्रीय केन्द्र के सभी सहकर्मियों के साथ साथ कुछ छात्र भी उपस्थित थे।

 डॉ . शम्भु शरण सिंह 

क्षेत्रीय निदेशक, 

इग्नू क्षेत्रीय केन्द्र ,सहरसा


Posted by

Pawan Kumar


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