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बेतिया। शिव का अर्थ है कल्याण। अर्थात शिव आनंद मंगल एवं कल्याण तीनों रूपो मे विद्यमान है। शिव सत्य एवं सनातन है। जिनमें सम्पूर्ण विश्व की क्रियायें सम्पादित होती रहती है। त्रिगुण युक्त भगवान शिव शक्ति के साथ सम्पूर्ण भूतों को उत्पन्न कर सृष्टि का सृजन करते हैं। उक्त बातें बेतिया डीह खैरटिया मे आयोजित शिव शक्ति सह प्राण प्रतिष्ठा महायज्ञ के पांचवे दिन यज्ञाचार्य श्री मिथिलेश दीक्षित जी ने कही। उन्होंने बताया कि भगवान शिव अर्द्धनारीश्वर रूप में विराजमान होकर जीवो को संदेश देते हैं कि सृष्टि की संरचना नर नारी के योग से ही संभव है। एक के बिना एक की कल्पना नही हो सकती। दोनों एक दूसरे के आधार एवं पूरक हैं दोनों का संबंध नि:स्वार्थ होनी चाहिए उन्होंने भगवान शिव एवं सती के दाम्पत्य जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आज पारिवारिक जीवन में पति पत्नी का संबंध स्वार्थपूर्ण होता जा रहा है भगवान शिव ने सती के वियोग में अपने श्वसुर का समूल नाश कर दिया था इससे प्रतीत होता है कि भगवान शिव का सती के साथ कितना आत्मीक संबंध था।महाशिवरात्रि होता है सर्वोत्तम व्रत श्री गायत्री ज्योतिष अनुसंधान केन्द्र के आचार्य शिवेन्द्र पाण्डेय जी ने बताया कि इस वर्ष ज्योतिषीय गणनानुसार शिवरात्रि मे खास योग प्राप्त हो रहा है जिसमें मुख्य रूप से बुधादित्य योग एवं गु0मं0के0 लाभगत होकर प्रजासुख धन धान्य वृद्धि प्रदान करने वाला है शिवरात्रि को अहर्निश आठ प्रहर मे शिव पूजा करने से विशेष फल मिलता है परन्तु रात्री मे शिव सहस्त्रनाम द्वारा सहस्र वेलपत्र चढाने से अभिष्ट सिद्धि प्राप्त होती है शिव पूजन मे रूद्राभिषेक करने का विशेष महत्व होता है ।रूद्राभिषेक मुख्यतः पंचामृत सहित गन्ना रस, कुश जल, वर्षा जल से करना चाहिए। रात्री समय में वर्तोपवास करते हुए शिव महात्म की कथा श्रवण करने से शिव सायुज्य की प्राप्ति होती है।।


Posted by

Pawan Kumar


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