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 रिपोर्ट : कमल सिंह सेंगर मनोरंजन पाठक ।।

छपरा  सारण : क्षयुवा संत व आध्यात्मिकगुरु और ओम ध्यान योग आध्यात्मिक साधना सत्संग सेवाश्रम के संस्थापक श्रीश्रीशैलेशगुरुजी ने 21 फरवरी यानी  शुक्रवार को मनाये जाने वाली फाल्गुनी महाशिवरात्रि व्रत पर प्रकाश डालते हुए कहा कि देवाधिदेव महादेव का निराकार से साकार रूप में प्रकटीकरण का यह महान पर्व महाशिवरात्रि व्रत में रात्रि का विशेष महत्व है अतः इस पर्व में व्रतियों द्वारा रात्रि जागरण करने का अत्यंत पुण्य फल प्राप्ति का उल्लेख मिलता है. शिवरहस्यानुसार और शिवपुराण में एक कथा प्रसंगानुसार इस व्रत में व्रतियों द्वारा श्रद्धा भक्ति एवं विश्वास के साथ जो रात्रि पर्यन्त जागरण कर शिव उपासना पूजन करता है उसके समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती है. शिवरात्रि पर चार प्रहर पूजन का विधान है किन्तु निशीथ काल पूजन उत्तम मानी जाती है जिसका विशेष महत्व है इस  बार पंचाङ्गानुसार महाशिवरात्रि में पूजन का श्रेष्ठ निशीथ काल प्रहर  है. वही ज्योतिष की दृष्टि में महाशिवरात्रि का व्रत शुक्रवार , उत्तराषाढ़ा तदोपरांत श्रवण नक्षत्र का योग  विशेष संयोग बना रहा है जिससे इस दिन शिव शङ्कर का पूजन अर्चन करना अत्यंत फलदायी माना जा रहा है.प्रदोषकाल व महानिशीथ काल मे चतुर्दशी का योग भी अपने आप मे श्रेष्ठकर हैं. महाशिवरात्रि व्रत का पारण 22 फरवरी शनिवार को प्रातः काल कर लिया जाएगा.

श्रीश्रीशैलेशगुरुजी ने बताया कि स्कन्दपुराणानुसार शिव मंदिर में दीप दान करने बृषभ उत्सर्ग (छोड़ना) या दान करने से शुभफल इंद्र के समान ऐश्वर्य श्री की प्राप्ति होती है. वही श्रीश्री शैलेशगुरुजी ने बताया कि ज्योतिष की दृष्टि से बारह राशियों(सूर्यादि द्वादश राशि )के जातकों के द्वारा किस शिवलिङ्ग की पूजन करना श्रेष्ठ व उत्तम फलदायक होगा और समस्त मनोकामनाओं की पूर्ति होगी वह अपने राशिनुसार इस प्रकार जानें-:


Posted by

Pawan Kumar


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