आरबीएसके की टीम ने बच्चों को किया था चयनित

• मुख्यमंत्री के महत्वकांक्षी योजना में शामिल है बाल हृदय योजना

• अब तक कई नौनिहालों को मिल चुकी है नई जिन्दगी

किशोर कुमार की रिपोर्ट

मधुबनी-मुख्यमंत्री के महत्वकांक्षी योजना सात निश्चय पार्ट-2 में शामिल बाल हृदय योजना से जन्मजात दिल में छेद से ग्रसित बच्चों के लिए जीवनदायनी साबित हो रही है। मधुबनी जिले के अब तक कई बच्चों का इस योजना के तहत सर्जरी किया जा चुका है। इसी कड़ी में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की टीम के द्वारा चयनित मधुबनी जिले के बेनीपट्टी प्रखंड के निवासी जय जय राम के पांच वर्षीय पुत्र दिव्यांशु कुमार, खुटौना प्रखंड के राधे श्याम ठाकुर के 4 वर्षीय पुत्र नंद किशोर ठाकुर तथा पंडौल प्रखंड के संतोष कुमार यादव के 2 वर्षीय पुत्र विजेंद्र कुमार यादव का बाल हृदय योजना के तहत हृदयरोग के निःशुल्क ऑपरेशन किया गया। चारो बच्चों एवं माता पिता/अभिभावक को पटना हवाई अड्डे से निःशुल्क हवाई यात्रा के माध्यम से अहमदाबाद  पहुंचाया गया। जहां श्री सत्य साईं हॉस्पिटल में इन बच्चों का ऑपरेशन किया गया। साथ ही राजनगर प्रखण्ड के उमेश कामत के पुत्र अविनाश कुमार को दूसरी बार भेजा गया जिसका चिकित्सको के टीम द्वारा जाँच में निर्णय लिया गया है कि 1 वर्ष इलाज जारी रखा जाय एवं ऑपरेशन 17 वर्ष से 18 वर्ष होने तक रोक दिया गया है! 


हवाई जहाज से अहमदाबाद निशुल्क भेजे जाते हैं सभी बच्चे एवं अभिभावक:


राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के जिला समन्वयक डॉ. कमलेश कुमार शर्मा ने बताया कि मधुबनी जिले से कुल 4 बच्चों को दिल के ऑपरेशन हेतु अहमदाबाद भेजा गया था जिसमें 3 बच्चे का ऑपरेशन सफलतापूर्वक किया गया तथा एक बच्चे का 17 से 18 वर्ष की आयु के होने के बाद ऑपरेशन किया जाएगा तत्काल उन्हें दवा के माध्यम से ठीक करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने बताया जिले के किसी प्रखंड में अगर हृदय रोग से ग्रसित कोई बच्चा हो तो संबंधित प्रखंड के आरबीएसके के टीम से संपर्क कर बच्चे का निशुल्क ऑपरेशन करवाने के लिए संपर्क कर सकते हैं।


प्रखंड स्तर पर आरबीएसके की टीम करती है स्क्रीनिंग :


सिविल सर्जन डॉ. सुनील कुमार झा ने बताया कि आर.बी.एस.के.भारत सरकार की महत्त्वपूर्ण योजना है मधुबनी जिला के सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में आर.बी.एस.के. टीम कार्यरत हैं जिसके द्वारा जन्म से 18 वर्ष तक के आयुवर्ग के बच्चों में होने वाले कुल 45 प्रकार के रोगों को चिन्हित कर इलाज कराया जाता है! जबकि बाल हृदय योजना सात निश्चय पार्ट-2 बिहार सरकार की महत्वपूर्ण योजना है हृदय में छेद के साथ जन्मे बच्चों की पहचान के लिए जिलास्तर पर स्क्रीनिंग की जाती है। जिसमें विशेषज्ञ डॉक्टरों के अलावा अन्य अधिकारी भी शामिल होते हैं। जहां से बच्चों को इलाज के लिए आइ.जी.आइ.एम.एस,पटना एवं आई.जी.आई.सी पटना भेजा जाता है राज्य स्तर पर बच्चों के सभी जाँच के बाद तिथि निर्धारित कर अहमदाबार रेफर किया जाता है। स्क्रीनिंग से लेकर इलाज पर आने वाला पूरा खर्च सरकार उठाती है। किसी बच्चे के हृदय में छेद हो जाता है तो किसी को जानकारी रहती नहीं है। बाद में कुछ उम्र के बाद बच्चों को कई तरह की कठिनाई होने लगती है। इसको ध्यान में रखते हुए यह बच्चों की निःशुल्क जांच एवं ईलाज की व्यवस्था की गयी है।


जिला के 50 बच्चों की इंदिरा गाँधी आयुर्विज्ञान संस्थान में होगी जाँच:

 

सरकार द्वारा जन्म से हृदय में छेद वाले बच्चों तथा हृदय में अन्य बीमारियों से ग्रसित मधुबनी जिले के लगभग 50 बच्चों को चिन्हित कर आरबीएसके टीम के द्वारा समुचित ईलाज के लिए 6 अगस्त को इंदिरा गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियोलॉजी पटना में श्री सत्य साईं अस्पताल अहमदाबाद के टीम के द्वारा भेजा जाँच हेतु शिविर का आयोजन किया गया है! अपर कार्यापालक निदेशक, राज्य स्वस्थ्य समिति बिहार पटना के द्वारा पत्र के माध्यम से अधिकांश बच्चों को भेजने का निदेश दिया गया है।


102 एंबुलेंस की सुविधा नि:शुल्क:


जिला कार्यक्रम प्रबंधक दयाशंकर निधि ने कहा कि बाल हृदय योजना के तहत बच्चों को नि:शुल्क 102 एंबुलेंस की सुविधा मुहैया करायी जाती है। बच्चों को घर से अस्पताल या अहमदाबाद जाने के लिए एयरपोर्ट, या अस्पताल से घर तक पहुंचाने के लिए 102 एंबुलेंस की सुविधा मुहैया करायी जाती है। जिसका खर्च विभाग की तरफ से वहन किया जाता है। आरबीएसके कार्यक्रम मुख्य रूप से बच्चों के बीमारी दूर करने का कार्यक्रम है। इसके तहत कई बीमारी का इलाज करने का प्रयास किया जा रहा है। टीम के सदस्य ऐसे गांव में पीड़ित परिवार से जाकर मिलते हैं। उन्हें सरकारी कार्यक्रम की जानकारी देते हैं। इसके बाद बच्चों का इलाज होता है। जिला के आम जनता से अपील है कि जन्मजात रोगों एवं हृदय रोग से कोई बच्चा पीड़ित हैं तो संबंधित प्रखंड के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में कार्यरत आर.बी.एस.के. टीम से सम्पर्क कर इलाज हेतु भेजा जाय!


 


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Posted by : Raushan Pratyek Media

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