एफएसएल की जांच रिपोर्ट में शहीद थानेदार के मामले का हुआ खुलासा, हड़कंप                               

सरफराज आलम की रिपोर्ट                  

खगड़िया/गोगरी : खगड़िया जिले के पसराहा थाना में पदस्थापित थानेदार अपराधियों के साथ एनकाउंटर में नहीं,बल्कि साथी पुलिस वाले की गोली का ही शिकार हुए थे। इस मामले का सच तो धीरे-धीरे सामने आ ही रहा है, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और एफएसएल की रिपोर्ट में परत दर परत खुलासा भी होता जा रहा है। दरअसल,इस एनकाउंटर मामले में थानेदार के शहादत की गूंज पूरे बिहार के कोने-कोने तक सुनाई दी थी।लेकिन इस बेहद संगीन घटना में मानवाधिकार आयोग ने स्वत: संज्ञान लिया और पुलिस की पूरी की पूरी कार्रवाई को संदिग्ध पाया। इस घटना में कई ऐसे बिंदु थे, जो मामले को शुरुआत से ही संदिग्ध बना रहे थे। मामले की जब जांच शुरु हुई,तो संदिग्धता सामने आने लगी। मामला संदिग्ध जानकर मुठभेड़ के दौरान पुलिस द्वारा इस्तेमाल किए गए हथियारों की जांच बिहार एफएसएल से कराई गई। 

थानेदार की पिस्टल से नहीं हुई थी फायरिंग

एफएसएल की जांच में इस बात का खुलासा हुआ,कि थानाध्यक्ष आशीष कुमार सिंह के 9 एमएम की सर्विस पिस्टल से फायरिंग नहीं हुई थी। सीएसआर रिपोर्ट में इस बात को प्रमाणित कर दिया गया है,कि थानेदार की पिस्टल से कोई फायरिंग नहीं हुई थी।इतना ही नहीं,मुठभेड़ में मौत के शिकार हुए पुलिस जवान श्रवण यादव को बेहद नजदीक से गोली लगने की पुष्टि की गई है। जबकि एफआईआर में दूर से फायरिंग का जिक्र किया गया है।मुठभेड़ में शामिल अन्य पुलिसकर्मियों द्वारा इस्तेमाल इंसास राइफल 2 पॉइंट 303 रायफल 1 की जांच एफएसएल से कराई गई तो मामला दूसरी तरफ मोड़ ले लिया।बता दें कि बीते वर्ष 2018के 11 अक्टूबर को पुलिस और कुख्यात अपराधी दिनेश मुनि व उनके शागिर्द अपराधियों के साथ मुठभेड़ में थानेदार आशीष कुमार सिंह के शहीद होने की बात कही गई थी।एक आरक्षी के घायल होने का भी मामला सामने आया था।इस मामले में मुठभेड़ की एफएसएल की रिपोर्ट से बड़ा खुलासा हुआ है। रिपोर्ट में कहा गया है कि कथित मुठभेड़ तो हुआ ही नहीं था , बल्कि यह एक फर्जी एनकाउंटर था।

पुलिसकर्मी की गोली से दरोगा आशीष की हुई थी मौत

पोस्टमार्टम की रिपोर्ट में थानेदार के शरीर से निकली गोली ने मामले को पूरी तरह से फेक एनकाउंटर की तरफ मोड़ दिया।जांचोपरांत पूरा मामला एनकाउंटर में शामिल खाकी वालों पर  ही न केवल सवाल खड़ा करने लगा है,बल्कि यह जान पड़ता है कि पुलिसकर्मियों ने न केवल श्रवण यादव को गिरफ्तार करने की बजाय उसकी हत्या कर दी बल्कि दुर्घटना बस या धोखे से ही सही,अपने थाना अध्यक्ष आशीष कुमार सिंह को गोलियों का शिकार बना लिया।पुलिस वालों ने सच को छुपाते हुए न केवल एक बनावटी एनकाउंटर की कहानी सुनाई,बल्कि बद हवासी में अपने साथी सिपाही को भी गोली मारकर जख्मी कर दिया।                

पुलिस अपराधी मुठभेड़ की कहानी  

घटना को एनकाउंटर बताते हुए पुलिस पदाधिकारी शंभू शरण शर्मा के बयान पर बिहपुर थाना में केस नंबर 402/18 दर्ज कराया गया था।दर्ज एफआइआर के मुताबिक मुठभेड़ में पुलिस की घेराबंदी की भनक पाते ही अपराधियों ने पुलिस पर अंधाधुंध गोलीबारी शुरु कर दी।अपना बचाव करते हुए पसराहा के तत्कालीन थाना अध्यक्ष आशीष कुमार सिंह और छापेमारी टीम में शामिल पुलिस कर्मियों ने भी जवाबी फायरिंग की थी। एनकाउंटर में दरोगा आशीष कुमार सिंह शहीद हो गए थे वहीं आरक्षी दुर्गेश कुमार यादव जख्मी हो गए। थानेदार ने गोली लगने के बाद बाकायदा अदम्य साहस दिखाते हुए अपराधी श्रवण यादव को मार गिराया था। बता दें कि दारोगा के पिता गोपाल सिंह ने जनवरी के पहले सप्ताह में अपने बेटे की हत्या को साजिशन बताते हुए मानवाधिकार आयोग को पत्र भेज कर जांच की मांग की थी।


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Posted by : Raushan Pratyek Media

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